Poetry, Poetry (Hindi), SpeakYourHeart
कुछ थे जो टिमटिमाते  उन  ख्वाबों को लेकर आगे बढ़ते  रहे
कुछ थे जो इंतज़ार करते थे पसंद और इंतज़ार करते रहे
फर्क नज़रिये का इतना है कि क्या कहें
कुछ सुनते गए अफसाने, कुछ सुनाते गये …

~प्रांजु दफ्तरी
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Poetry, Poetry (Hindi)

खोल दिये हैं  बेपरवाह होकर ज़हन के राज़ सारे..
हक फ़कत खुद को दिया  था जिनपर,
उन ज़ख्मो से परे है अब हाथ हमारे
चमकते उन सितारों को भी  इल्म नहीं
कि टूटके बिखरना है एक दिन
ना जाने क्यूँ आसमां से जोड़े फिर भी हमने ख्वाब सारे

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Poetry, Poetry (Hindi)

आयने से बेहतर पर आयने सा भोला ..

यूँ तो मिलते रहेंगे हमराह ता-उम्र
मगर दिलकश मिलते हैं जो
उनकी एक तस्वीर तो लूँ
तस्वीरें गुम हो जाती हैं कागज़ के टुकडों पर और
मोबाईल के परदों के पीछे ये नज़र नहीं आती
तो करूँ क्या
दिल में कोई आयना रख लूँ …
मगर छोटा सा दिल है मेरा
आयने का बोझ उठायेगा कैसे
टूट के बिखरा जो शीशा कभी तो
चुभन पे मरहम लगायेगा कैसे
दिल को मैने फिर
आयने से बेहतर बना दिया
छू कर गुज़रते जो भी इसे
उनकी तस्वीर छिपाना सीखा दिया
नाज़ होने लगा जैसे ही
दिल को हुनर पे अपने
उस दिलकश ने हटाया मुखौटा और
घुमान इसका मिट्टी में मिला दिया..

~प्रांजु

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Poetry, Poetry (Hindi)

तुम अनमोल हो ..

ना, आज तारीफों के पुल नहीं कोई 
पर लफ़ज़ो  में शायाद फिर भी छुपे जस्बात है 
दुआ का सागर शाम ढलते भेजा है 
क्यूंकि शाम के बाद नया सवेरा खास है 
उम्मीद एक ऐसा जज़्बा है 
जो हर सांस मे साज़ भरता है 
वो उम्मीद उजागर हो फिर तरो ताज़ा 
ऐसा एक नन्हा पैगाम भेजा है 
मिलेगा तुम्हे वो सब जिसके तुम हाकदार हो 
ज़िन्दगी लेती है इम्तहान 
और तुम अभी एक उम्मीदवार हो 
तुम्हारी कीमत को तुम्हे ही आंकना है 
दुनिया बाद मे समझेगी 
मुश्किलें ये एक ऐसी गुत्थी है 
जो सिर्फ तुमसे सुलझेगी 
दिल जो पाक है तुम्हारा 
उसपे अभिमान क्यूँ न हो 
आंका नही तुमने खुद को भले ही 
पर दिल से गर पुछोगे  हमारे 
तो जानोगे कि तुम हिम्मत हो हमारी 
और ये के तुम अनमोल हो 
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Poetry, Poetry (Hindi)
मिले जो हर वक्त समझने वाला तुम्हे 
ये ज़रूरी तो नहीं 
कभी राह चलते कुछ रिश्ते यूँहि बन जाते हैं 
कुछ लबों पे मुस्कान तो कुछ दिल को छू जाते हैं 
ज़रूरी नहीं हर बार कोई हमराज़ मिले 
नहीं मिलते कई बार कुछ सुर 
के ज़रूरी नहीं हर बार कोई साज़ छिड़े 
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Poetry, Poetry (Hindi)

पिता

बिन  मांगे दिया सब कुछ 
फिर भी खत्म कभी ज़रुरतें ना हुईं 
माँ की ममता को समझा सभी ने 
पिता के दिल की कभी बात ही ना हुईं 
 
पिता हैं वो आंसू बहा कैसे देते 
सख्त ना होते अगर 
तो अनुशासान क्या कभी सिखा वो पाते 
समझ नहीं थी तब ,उन्हे जान ना पाये 
वो भी छुपा जाते थे आंसु, प्यार कभी ज़ता ना पाये 
 
बच्चों से जुडे उनके भी सपने हैं 
टूटे जो नन्हे  ख्वाब कभी
वो दर्द भी पापा ने माने अपने हैं 
हैं वो तो हिम्मत बच्चों की है 
वो है तो ज़िन्दा उनके ख्वाब हैं 
हैं वो तो सिमटे हैं दर्द अभी 
वो हैं तो कांटे हैं दूर सभी 
 
जो किया उन्होने, कोई कर ना पायेगा 
प्यार उनसा कोई  कभी दे ना पायेगा 
जो सब कुछ लुटाकार भी 
तुम्हारी खुशियां ही मांगे 
ऐसा कोई कभी मिल ना पायेगा
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Poetry (Hindi)
शिकायत नहीं मुझे रुठने से तेरे 
मगर हैरान हूँ कि एक हक जताने से  कैसे 
रिश्तों के मायने बदल जाते हैं 
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