Poetry, Poetry (Hindi)

पिता

बिन  मांगे दिया सब कुछ 
फिर भी खत्म कभी ज़रुरतें ना हुईं 
माँ की ममता को समझा सभी ने 
पिता के दिल की कभी बात ही ना हुईं 
 
पिता हैं वो आंसू बहा कैसे देते 
सख्त ना होते अगर 
तो अनुशासान क्या कभी सिखा वो पाते 
समझ नहीं थी तब ,उन्हे जान ना पाये 
वो भी छुपा जाते थे आंसु, प्यार कभी ज़ता ना पाये 
 
बच्चों से जुडे उनके भी सपने हैं 
टूटे जो नन्हे  ख्वाब कभी
वो दर्द भी पापा ने माने अपने हैं 
हैं वो तो हिम्मत बच्चों की है 
वो है तो ज़िन्दा उनके ख्वाब हैं 
हैं वो तो सिमटे हैं दर्द अभी 
वो हैं तो कांटे हैं दूर सभी 
 
जो किया उन्होने, कोई कर ना पायेगा 
प्यार उनसा कोई  कभी दे ना पायेगा 
जो सब कुछ लुटाकार भी 
तुम्हारी खुशियां ही मांगे 
ऐसा कोई कभी मिल ना पायेगा
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Poetry (Hindi)
शिकायत नहीं मुझे रुठने से तेरे 
मगर हैरान हूँ कि एक हक जताने से  कैसे 
रिश्तों के मायने बदल जाते हैं 
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Poetry (Hindi)
जी आपको भरोसा कैसे दिला दें 
हम तो खुद से भी दगा करते हैं 
मुँह मोड के निकले थे जिन गलियों से कभी 
वहीं चुपके से राह तका करते हैं 
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Poetry (Hindi)
महज़ लफ़ज़ों से  छलके  प्यार ने 
छुआ है इस कदर दिल को 
जगह अगर दिल मे होती 
तो बात कुछ और थी..
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Poetry (Hindi)
कई छोड़ गये हमें बेपरवाह 
कुछ ने इस कदर पनाह दी 
के कश्मकश छिड़ी फिर सोचा 
काबिल थे नहीं किसी के लिये 
या परखने मे उन्हें  ही  कोई चुक हुई 
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