Poetry, Poetry (Hindi)

तुम अनमोल हो ..

ना, आज तारीफों के पुल नहीं कोई 
पर लफ़ज़ो  में शायाद फिर भी छुपे जस्बात है 
दुआ का सागर शाम ढलते भेजा है 
क्यूंकि शाम के बाद नया सवेरा खास है 
उम्मीद एक ऐसा जज़्बा है 
जो हर सांस मे साज़ भरता है 
वो उम्मीद उजागर हो फिर तरो ताज़ा 
ऐसा एक नन्हा पैगाम भेजा है 
मिलेगा तुम्हे वो सब जिसके तुम हाकदार हो 
ज़िन्दगी लेती है इम्तहान 
और तुम अभी एक उम्मीदवार हो 
तुम्हारी कीमत को तुम्हे ही आंकना है 
दुनिया बाद मे समझेगी 
मुश्किलें ये एक ऐसी गुत्थी है 
जो सिर्फ तुमसे सुलझेगी 
दिल जो पाक है तुम्हारा 
उसपे अभिमान क्यूँ न हो 
आंका नही तुमने खुद को भले ही 
पर दिल से गर पुछोगे  हमारे 
तो जानोगे कि तुम हिम्मत हो हमारी 
और ये के तुम अनमोल हो 
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Poetry, Poetry (Hindi)
मिले जो हर वक्त समझने वाला तुम्हे 
ये ज़रूरी तो नहीं 
कभी राह चलते कुछ रिश्ते यूँहि बन जाते हैं 
कुछ लबों पे मुस्कान तो कुछ दिल को छू जाते हैं 
ज़रूरी नहीं हर बार कोई हमराज़ मिले 
नहीं मिलते कई बार कुछ सुर 
के ज़रूरी नहीं हर बार कोई साज़ छिड़े 
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